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भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत एजेंसी के प्रावधान निम्नलिखित हैं:

एजेंसी के प्रावधान

- धारा 182: एजेंट की परिभाषा - एजेंट वह व्यक्ति होता है जो अपने प्रिंसिपल की ओर से कार्य करता है और प्रिंसिपल के निर्देशों के अनुसार काम करता है।
- धारा 183: एजेंट की योग्यता - कोई भी व्यक्ति एजेंट बन सकता है, लेकिन एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए उसे प्रिंसिपल के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है।
- धारा 184: कौन प्रिंसिपल हो सकता है - कोई भी व्यक्ति जो संविदा करने में सक्षम है, वह प्रिंसिपल हो सकता है।
- धारा 185: एजेंसी का प्रतिफल - एजेंसी का प्रतिफल वह राशि होती है जो प्रिंसिपल एजेंट को उसके कार्य के लिए देता है।
- धारा 186: एजेंसी का प्रकटीकरण - एजेंट को अपने प्रिंसिपल के प्रति अपने एजेंसी संबंध का प्रकटीकरण करना होता है।
- धारा 187: एजेंट की शक्तियाँ - एजेंट की शक्तियाँ प्रिंसिपल द्वारा दी गई शक्तियों तक सीमित होती हैं।
- धारा 188: एजेंट के कर्तव्य - एजेंट के कर्तव्यों में प्रिंसिपल के हितों की रक्षा करना और प्रिंसिपल के निर्देशों का पालन करना शामिल है।
- धारा 189: एजेंट के अधिकार - एजेंट के अधिकार प्रिंसिपल द्वारा दिए गए अधिकारों तक सीमित होते हैं।
- धारा 190: जब कोई एजेंट कार्य सौंप नहीं सकता - एजेंट अपने कार्यों को तब तक किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सौंप सकता जब तक कि व्यापार का सामान्य रिवाज इसकी अनुमति न दे या एजेंसी की प्रकृति इसकी आवश्यकता न हो।
- धारा 191: उप-एजेंट की परिभाषा - उप-एजेंट वह व्यक्ति होता है जो एजेंट द्वारा नियुक्त किया जाता है और एजेंट के निर्देशों के अनुसार काम करता है।
- धारा 192: उचित रूप से नियुक्त उप-एजेंट द्वारा प्रतिनिधित्व - यदि एजेंट को उप-एजेंट नियुक्त करने का अधिकार है, तो उप-एजेंट प्रिंसिपल का एजेंट बन जाता है।
- धारा 193: अनधिकृत उप-एजेंट के लिए जिम्मेदारी - यदि एजेंट बिना अधिकार के उप-एजेंट नियुक्त करता है, तो एजेंट उप-एजेंट के कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
- धारा 194: विधिवत नियुक्त व्यक्ति के साथ प्रिंसिपल-एजेंट का संबंध - यदि एजेंट को उप-एजेंट नियुक्त करने का अधिकार है, तो प्रिंसिपल और उप-एजेंट के बीच एक एजेंसी संबंध स्थापित होता है।
- धारा 195: किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करने में एजेंट का कर्तव्य - एजेंट को उप-एजेंट नियुक्त करते समय उचित देखभाल करनी चाहिए।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

- एजेंसी का समापन: एजेंसी का समापन प्रिंसिपल या एजेंट द्वारा किया जा सकता है, या यह एजेंसी के उद्देश्य की पूर्ति पर स्वतः समाप्त हो सकती है।
- एजेंट के कर्तव्य: एजेंट के कर्तव्यों में प्रिंसिपल के हितों की रक्षा करना, प्रिंसिपल के निर्देशों का पालन करना, और एजेंसी संबंध के बारे में प्रिंसिपल को सूचित करना शामिल है।
- प्रिंसिपल के अधिकार: प्रिंसिपल के अधिकारों में एजेंट को निर्देश देना, एजेंट के कार्यों की निगरानी करना, और एजेंसी संबंध को समाप्त करना शामिल है।

रिकवरी एजेंट के अधिकार (क्या कर सकते हैं):
संपर्क करना: वे आपको फोन या अन्य माध्यम से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच.
जानकारी मांगना: वे आपसे कर्ज चुकाने या भुगतान योजना पर चर्चा करने के लिए बात कर सकते हैं.
संपत्ति ढूंढना (कुछ मामलों में): यदि वे वाहन या संपत्ति जब्त करने के लिए अधिकृत हैं, तो वे उसे ढूंढ सकते हैं.
खुली जगह से लेना (Repossession): यदि वाहन या संपत्ति खुली जगह (जैसे खुले यार्ड/ड्राइववे) पर है, तो वे उसे ले सकते हैं, बशर्ते वे शांति भंग न करें (कोई जबरदस्ती या तोड़-फोड़ नहीं).

रिकवरी एजेंट के अधिकार नहीं (क्या नहीं कर सकते):
धमकी या हिंसा: वे धमकी, हिंसा, या किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का सहारा नहीं ले सकते.
निजता का उल्लंघन: वे आपकी निजी जगह (घर, ऑफिस) में आपकी अनुमति के बिना जबरन नहीं घुस सकते.
जबरन प्रवेश (Breach of Peace): वे ताला तोड़कर, किसी और वाहन को हटाकर, या किसी भी तरह से जबरदस्ती करके संपत्ति नहीं ले सकते (जैसे बंद गैरेज से).
जानकारी लीक करना: वे आपके कर्ज या वसूली की जानकारी आपके परिवार, दोस्तों या सहकर्मियों को नहीं बता सकते.
अनुचित समय पर कॉल/विज़िट: वे रात 10 बजे से सुबह 7 बजे के बीच या सार्वजनिक अवकाश पर आपको परेशान नहीं कर सकते.